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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी के बाहुबलियों पर कसा शिकंजा

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किसी भी कोर्ट के आदेश को जातीय चश्मे से देखने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए।

अगर सूची में कुछ राजपूत नेताओं के नाम हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि “राजपूतों को टारगेट” किया जा रहा है। उसी सूची में अलग-अलग राजनीतिक/सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग भी बताए जा रहे हैं। सवाल जाति का नहीं, बल्कि यह है कि:

हथियार लाइसेंस नियमों के तहत जारी हुए या नहीं

उनका दुरुपयोग हुआ या नहीं

प्रशासन ने नियमों का पालन किया या नहीं

  • अगर कोर्ट सिर्फ़ एक ही समुदाय को चुनकर कार्रवाई करता और बाकी समान मामलों को छोड़ देता, तब पक्षपात का सवाल उठता। अभी जो जानकारी है, वह “गन कल्चर और बाहुबल” पर न्यायिक सख्ती दिखाती है, न कि किसी जाति विशेष पर कार्रवाई

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