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||लखनऊ||चिनहट के मल्हौर CHC में 30 साल पुरानी ‘जंग लगी’ मशीन के भरोसे मरीजों की सेहत,,

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राजधानी के चिनहट (मल्हौर) स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाएं खुद बीमार नजर आ रही हैं मरीजों को बेहतर सुविधा देने के सरकारी दावों के बीच यहाँ लगी एक्स-रे मशीन अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। आलम यह है कि तीन दशक पुरानी यह मशीन अब पूरी तरह जवाब दे चुकी है जिससे क्षेत्र की एक बड़ी आबादी प्रभावित हो रही है।

मल्हौर CHC पर यह एक्स-रे मशीन करीब 30 साल पहले मरीजों की सुविधा के लिए स्थापित की गई थी अब मशीन के पुर्जों में जंग लग चुकी है ताज्जुब की बात यह है कि तकनीकी रूप से दम तोड़ चुकी इस मशीन के सहारे ही स्वास्थ्य कर्मी आज भी मरीजों की सेवा करने को मजबूर हैं||

हड्डी की चोट या अन्य गंभीर बीमारियों के लिए आने वाले मरीजों को सटीक जांच नहीं मिल पा रही है।

लैब टेक्नीशियन और कर्मचारी उसी पुरानी तकनीक और खराब मशीन के साथ संघर्ष कर रहे हैं, जिससे जांच रिपोर्ट की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े होते हैं।

एक तरफ सरकार प्रदेश के हर चिकित्सा केंद्र को हाई-टेक और डिजिटल बनाने का संकल्प दोहरा रही है वहीं दूसरी ओर राजधानी के ही इस केंद्र पर डिजिटल एक्स-रे मशीन का न होना सिस्टम की पोल खोलता है। पुरानी मशीन होने के कारण मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और कई बार उन्हें निजी सेंटरों का रुख करना पड़ता है, जहाँ उनसे मोटी रकम वसूली जाती है।

जल्द स्थापित हो नई मशीन
स्थानीय निवासियों और स्वास्थ्य केंद्र आने वाले मरीजों ने शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है कि जंग खा चुकी इस पुरानी मशीन को तत्काल प्रभाव से बदला जाए।

तकनीकी कर्मचारियों को नए उपकरणों के साथ काम करने की सुविधा मुहैया कराया जाना अति आवश्यक है।

जब मशीन ही खुद जंग खा रही है तो वह हमारी हड्डियों की सही तस्वीर क्या दिखाएगी? हमें उम्मीद है कि स्वास्थ्य विभाग इस ओर ध्यान देगा और जल्द ही यहाँ नई मशीन आएगी।”
— एक स्थानीय मरीज

चिनहट जैसे बढ़ते हुए क्षेत्र के लिए मल्हौर CHC एक महत्वपूर्ण कड़ी है यदि यहाँ जल्द ही डिजिटल एक्स-रे मशीन नहीं लगाई गई तो गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा।
विभागीय अधिकारियों को इस बदहाली के आंसू पोंछने के लिए कड़े और त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है।

Reporting by Mohammad Nasir Arif Journalist

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सबसे ज्यादा पड़ गई

काकोरी, लखनऊ। काकोरी क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध सड़क निर्माण का मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने के बाद राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और अवैध कब्जे की पुष्टि की। अधिकारियों ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है।मामला काकोरी स्थित किसान पथ के पास चिलौली अंडरपास क्षेत्र का है, जहां फुटपाथ, पिलर और एंगल बाउंड्री को तोड़कर सड़क और मकान निर्माण किए जाने की शिकायत मिली थी। जांच में सामने आया कि यह निर्माण कार्य सरकारी भूमि पर किया जा रहा था।राजस्व विभाग के अनुसार, निर्माण कार्य सुरक्षित गाटा संख्या 335 (तालाब), गाटा संख्या 222 (बंजर) और 223 (चारागाह) की भूमि पर किया गया। बताया जा रहा है कि पिछले करीब एक सप्ताह से यह निर्माण कार्य चल रहा था।शनिवार को राजस्व निरीक्षक अशोक सिंह के नेतृत्व में टीम ने पैमाइश की। जांच में करीब 20 मीटर लंबी और 5 मीटर चौड़ी कच्ची सड़क सरकारी जमीन पर बनाए जाने की पुष्टि हुई। अधिकारियों ने कहा कि अवैध सड़क को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।मौके पर ग्राम प्रधान आनंद यादव, रियल एस्टेट कारोबारी सुनील कुमार, पूर्णैदु यादव, रामा लोधी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।