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लखनऊ,गोमती नगर मौत का ‘खुला निमंत्रण’ बांट रहा बिजली विभाग, साहब को शायद बड़े हादसे का इंतज़ार!

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गोमती नगर जैसे पॉश इलाके में बिजली विभाग ने ‘मौत का नया पता’ ढूंढ लिया है। सेक्टर 01 पावर हाउस के अंतर्गत आने वाले खंभों में इस कदर करंट उतर रहा है कि सड़क पर चलना अब ‘खतरों के खिलाड़ी’ होने जैसा है। हाल ही में एक कार सवार बाल-बाल बचा, वरना आज विभाग के पास संवेदना जताने के अलावा कोई काम न होता।

पार्षद की ‘गुहार’ और साहब का ‘अहंकार’
क्षेत्रीय पार्षद ने एक बार नहीं, बल्कि कई बार विभाग के कान में तेल डालने की कोशिश की,लेकिन विभाग ‘कुंभकर्णी नींद’ में ऐसा सोया है कि जागने का नाम ही नहीं ले रहा|

शायद फाइलों का वजन इतना ज्यादा है कि अवर अभियंता (JE) को फील्ड पर आने की फुर्सत ही नहीं मिल रही|

जब ‘पावर’ हाउस में हो, तो सुरक्षा की क्या ज़रूरत?
अवर अभियंता (JE): “हमें क्या पता करंट लग रहा है? हम तो दफ्तर में बैठकर वोल्टेज चेक कर रहे हैं, जनता खुद ही तो अर्थिंग का काम कर रही है!”

अधिशासी अभियंता (EE): “सुना है कार सवार बच गया? चलिए, अगली बार खंभे को और ज़्यादा ‘पावरफुल’ बनाएंगे ताकि कोई शिकायत करने लायक ही न बचे।”

बड़ी बातें जो आपको डरा देंगी:
मौका मुआयना? साहब के जूते गंदे हो जाएंगे, इसलिए वो आते नहीं।

जनता में खौफ: लोग अब खंभों को ‘बिजली का पोल’ नहीं, ‘यमराज का खंभा’ कह रहे हैं।

लापरवाही की इंतहा: गोमती नगर ज़ोन में अगर सुरक्षा के ये हाल हैं, तो बाकी लखनऊ का तो ईश्वर ही मालिक है।

“अरे साहब! फाइलें बाद में लटका लेना, पहले इन नंगे तारों को देख लो। कहीं ऐसा न हो कि आपकी ‘चुप्पी’ किसी घर के चिराग की ‘खामोशी’ बन जाए।”

Reporting by Vikas Singh

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