- भाजपा का ‘अपना’ एजेंडा: अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा बजट के माध्यम से केवल “अपने लोगों को सेट” करती है। उन्होंने दावा किया कि यह बजट देश की मात्र 5% (1/20) जनसंख्या के मुनाफे और तरक्की को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
- गरीबों की अनदेखी: उन्होंने कहा कि एक “अच्छा बजट” वह होता है जिससे गरीबों की तरक्की हो और उनके चेहरों पर मुस्कान आए, लेकिन वर्तमान सरकार से उन्हें ऐसी कोई उम्मीद नहीं है।
- प्रदूषण और प्रकृति पर कटाक्ष: दिल्ली के खराब प्रदूषण स्तर पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि यह तो “भगवान की कृपा” है कि हवा चल गई और बारिश हो गई, अन्यथा यहाँ खड़े होकर सांस लेना भी दूभर था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पर्यावरण (विशेषकर अरावली) की रक्षा नहीं की गई, तो दिल्ली दुनिया की “प्रदूषण राजधानी” बन जाएगी।
- विफल वादों पर सवाल: उन्होंने सरकार से पिछले वादों का हिसाब मांगते हुए पूछा कि कितनी “स्मार्ट सिटी” बनीं और क्या किसानों की आय दोगुनी हुई। उन्होंने इस बजट को सुधारों वाला बजट (Reform Budget) न मानकर एक “खराब ढांचा” (Deform Budget) करार दिया।
विपक्ष के अन्य नेताओं के साथ अखिलेश यादव ने भी मनरेगा (MGNREGA) में किए गए बदलावों और उत्तर प्रदेश के लिए कम बजटीय आवंटन पर सरकार को घेरा है।


