कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- जमानत याचिका खारिज: चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें सेंगर की 10 साल की सजा को निलंबित करने और जमानत देने से मना किया गया था।
- फास्ट ट्रैक सुनवाई का निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट को आदेश दिया है कि वह सेंगर की मुख्य अपील पर 3 महीने के भीतर फैसला सुनाए।
- कड़ा रुख: कोर्ट ने कहा कि यह मामला “नैतिक अधमता” (moral turpitude) से जुड़ा है, इसलिए तत्काल राहत नहीं दी जा सकती।
- 7 साल की सजा पर दलील: सेंगर के वकील ने तर्क दिया कि वह 7 साल 7 महीने से अधिक की सजा काट चुके हैं, लेकिन कोर्ट ने इस आधार पर भी जमानत नहीं दी क्योंकि सेंगर पहले से ही रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
- विकसित घटनाक्रम: कोर्ट ने निर्देश दिया कि पीड़िता के परिवार द्वारा सजा बढ़ाने (Enhancement of sentence) के लिए दायर की गई अपील पर भी हाई कोर्ट सेंगर की अपील के साथ ही सुनवाई करे।
Reporting by Mohammad Nasir Arif Journalist



